बलिया में 2100 कुण्डीय वैदिक महायज्ञ का समापन:गुरु पूर्णिमा पर बटुकों ने की गुरु पूजा, गुरु-शिष्य परंपरा का दर्शन
बलिया में आषाढ़ पूर्णिमा के पावन पर्व गुरु पूर्णिमा पर भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम दर्शन हुआ। इस अवसर पर महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम, रामगढ़, गंगापुर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं शहर से सटे मिढ्ढा स्थित महर्षि सदाफलदेव आश्रम में 2100 कुण्डीय दो दिवसीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। श्री वेद विद्या सेवाश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित गुरुकुल में ब्रह्मचारियों ने अपने आचार्यों का वैदिक रीति से पूजन, चरण वंदन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। सुबह से शाम तक गुरुकुल परिसर वेदमंत्रों, रुद्रपाठ और शंखध्वनि से गुंजायमान रहा। ब्रह्मचारियों ने वैदिक यज्ञ और प्रार्थना के माध्यम से राष्ट्र, धर्म, गौमाता, गंगा तथा समस्त मानवता के कल्याण की कामना की। देखें, 3 तस्वीरें… इस अवसर पर गुरुकुल के आचार्यों ने गुरु को जीवन के अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश देने वाला पथप्रदर्शक बताया। उन्होंने तैत्तिरीय उपनिषद् के वाक्य “आचार्यदेवो भव” की प्रासंगिकता पर जोर दिया।
आचार्य मोहित पाठक ने कहा कि आधुनिक समय में जब शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित हो रही है, गुरुकुल व्यवस्था बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, सेवा, आत्मसंयम और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाती है। मिढ्ढा स्थित महर्षि सदाफलदेव आश्रम प्रांगण में प्रथमाचार्य श्री सदगुरू धर्मचन्द्र देव जी की 57वीं पुण्यतिथि और गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित 2100 कुण्डीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ का समापन हुआ। यह दो दिवसीय महायज्ञ शांति और कल्याण की भावना के साथ संपन्न हुआ।
इस अवसर पर अजय कुमार राय ने कहा कि गुरु पूर्णिमा एक विशेष अवसर है, जो उन सद्गुरुओं के सम्मान के लिए मनाया जाता है जिनके अवतरण से मानव का कल्याण होता है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारत की सनातन आत्मा बताया।

