बाबा काल भैरव का गुप्त नवरात्र पर भव्य विशेष श्रृंगार:राष्ट्र कल्याण के लिए हुई विशेष पूजा-अर्चना, VIDEO
धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में गुप्त नवरात्र की नवमी के पावन अवसर पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव का भव्य एवं दिव्य विशेष अलंकार श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलमय जीवन की कामना की। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बाबा का मनमोहक श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। गुप्त नवरात्र पर बाबा का हुआ श्रृंगार मंदिर के उपमहंत गुरुजी अवशेष पांडे ने बताया कि गुप्त नवरात्र की नवमी पर बाबा काल भैरव का यह विशेष अलंकार राष्ट्र के सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और संपूर्ण विश्व के कल्याण की भावना से किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और समाज जिन विभिन्न परिस्थितियों एवं उथल-पुथल से गुजर रहा है, उसे देखते हुए महंत परिवार ने बाबा काल भैरव के श्रीचरणों में विशेष पूजा-अर्चना कर सभी के लिए सद्बुद्धि, शांति और सौहार्द की प्रार्थना की। उन्होंने कहा, “हमने बाबा से प्रार्थना की है कि सभी को सद्बुद्धि प्रदान करें, समाज में आपसी प्रेम और भाईचारा बढ़े तथा राष्ट्र विकास और समृद्धि के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़े। इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ आज गुप्त नवरात्र की नवमी पर बाबा का विशेष श्रृंगार संपन्न कराया गया।” काशी में प्रवेश से पहले काल भैरव के दर्शन का महत्व गुरुजी अवशेष पांडे ने बाबा काल भैरव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में बाबा काल भैरव को काशी का कोतवाल माना जाता है। मान्यता है कि उनकी अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति काशी में प्रवेश नहीं कर सकता। इसलिए काशी आने वाले श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम बाबा काल भैरव के दर्शन और पूजन का विधान बताया गया है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक बाबा काल भैरव का दर्शन, पूजन और स्मरण करते हैं, बाबा उनकी सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करते हैं, भय और संकटों से रक्षा करते हैं तथा उनके जीवन के आंतरिक और बाहरी शत्रुओं का नाश कर उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। काशी के तीन खंडों का धार्मिक महत्व गुरुजी ने काशी की धार्मिक संरचना का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार काशी तीन प्रमुख खंडों ओमकार खंड, विश्वनाथ खंड और केदार खंड में विभाजित मानी जाती है। उन्होंने बताया कि ओमकार खंड में यदि किसी व्यक्ति का देहांत होता है तो उसे यम यातना और भैरव यातना दोनों का सामना करना पड़ता है। वहीं विश्वनाथ खंड में देह त्यागने वाले व्यक्ति को यम यातना नहीं होती, बल्कि उसके कर्मों के अनुसार बाबा काल भैरव ही न्याय प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार विश्वनाथ खंड में यमराज का प्रवेश नहीं होता और वहां कर्मों का निर्णय स्वयं बाबा काल भैरव के अधीन माना जाता है। श्रद्धालुओं में दिखी गहरी आस्था विशेष श्रृंगार और पूजन के दौरान मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय काल भैरव” के जयघोष से गूंज उठा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दर्शन के लिए लगी रहीं। भक्तों ने बाबा के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। गुप्त नवरात्र की नवमी पर संपन्न यह विशेष श्रृंगार काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं, सनातन आस्था और राष्ट्र कल्याण की भावना का अद्भुत संगम बना, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कर बाबा काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

