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ओला इलेक्ट्रिक को उपभोक्ता आयोग का झटका:अलीगढ़ में स्कूटी में बार-बार खराबी पर ग्राहक को नई स्कूटी देने या 1.02 लाख लौटाने का आदेश

ओला इलेक्ट्रिक की स्कूटी में बार-बार तकनीकी खराबी आने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कंपनी को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को ग्राहक वैभव शर्मा को नई स्कूटी देने या उसकी कीमत 1,02,505 रुपये वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 10 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अलग से देने होंगे। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत की संयुक्त पीठ ने सुनाया। आदेश का पालन 45 दिन के भीतर करना होगा।
एडवोकेट शिवम नायक ने बताया कि वैभव शर्मा ने 31 दिसंबर 2023 को ओला एस1 एक्स प्लस इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी। खरीद के कुछ समय बाद ही स्कूटी में तकनीकी समस्याएं आने लगीं। पार्किंग लॉक नहीं खुलता था, पासवर्ड से स्कूटी अनलॉक करने में परेशानी होती थी और रिवर्स गियर भी काम नहीं करता था। सीट ठीक से लॉक नहीं होती थी और ओला ऐप से कनेक्टिविटी की समस्या भी बनी रहती थी। स्कूटी अचानक बंद हो जाती थी और कई बार दोबारा चालू नहीं होती थी।
सर्विस सेंटर के चक्कर काटे, फिर भी नहीं मिली राहत
वैभव शर्मा ने कंपनी के सर्विस सेंटर पर कई बार शिकायत की। ऑनलाइन टिकट दर्ज कराने और ईमेल के जरिए समस्या बताने के बावजूद उनका आरोप था कि खराबियों का स्थायी समाधान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, कई शिकायतें बिना संतोषजनक समाधान के बंद कर दी गईं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी उठानी पड़ी। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अलीगढ़ में परिवाद दाखिल किया।
शिकायत में वैभव शर्मा ने दोषपूर्ण स्कूटी बदलने या उसे ठीक कराकर वारंटी के साथ वापस देने, दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद खर्च दिलाने की मांग की थी।
कंपनी ने आरोपों को नकारा
ओला इलेक्ट्रिक की ओर से शिकायत के आरोपों को निराधार बताया गया। कंपनी का तर्क था कि स्कूटी में कोई बड़ा विनिर्माण दोष नहीं था और सर्विस टीम ने वारंटी की शर्तों के अनुसार शिकायतों पर कार्रवाई की थी। कंपनी ने जॉब कार्ड का हवाला देते हुए परिवाद खारिज करने की मांग की।
दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद आयोग ने फैसला सुनाया। आदेश के मुताबिक, कंपनी को 45 दिन के भीतर नई स्कूटी देनी होगी या 1,02,505 रुपये लौटाने होंगे। इस राशि पर 10 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने होंगे। आदेश का पालन नहीं करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

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