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उर्दू के शायर पदमश्री डॉ. वशीर बद्र की याद में हुई शोकसभा
डॉ. बशीर बद्र ने अपने जीवन में दो बड़े दुखद हादसे देखे थे: डॉ. नसरीन बेगम
बाबा न्यूज
आगरा। अर्न्तराष्टÑीय ख्याति प्राप्त उर्दू के शायर पदमश्री डॉ. वशीर बद्र 28 मई को भोपाल में इसफानी दुनियां को अलविदा कह गये। बशीर बद्र का शेरी सफर 1950 के बाद शुरु हुआ था। उनके एक एक शिर दिलों पर असर छोड़ जाते हैं- दुश्मनी जम के करो लेकिन गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाए तो शर्मिन्दा न हो। ख्याति प्राप्त शायर की याद में बज्म -ए मैकश की जानिब से आस्ताना सल्लाम मैकश अकबराबादी पर एक शोक सभाआयोजित की गई। सभा की अध्यक्षता बज्म के सरपरस्त
सैयद अजमल अली शाह ने की। प्रो. नसरीन बेगम ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र ने अपने जीवन में दो बड़े सानहात देखे एक पत्नी का स्वर्गवास, जब वह अमेरिका में थे, दूसरा मेरठ का सांप्रयादिक फसाद, जब उनका घर जला दिया गया था। उनकी किताबें गजले सब राख हो गयी थी। वह टूट
गये थे। टूटकर संभलना बहुत कठिन होता है। लोग टूट जाते है एक घर बनाने में । शोकसभा में बशीर बद्र की शायरी के दीवाने अधिक संख्या में मौजूद रहे। संचालन शाहिद नदीम ने किया। उन्होंने एक शेर से श्रद्धांजलि पेश की अदब की मोकददस किताब की सूरत, महक रहा है,चमन में गुलाब की सूरत। इस अवसर पी माहिर अकबराबादी डॉ. वेद त्रिपाठी, सुहेल लखनवी, डॉ. सिब्ते हसन नकबी, जिया हाशमी, नवेद अतहर सिद्दीकी, सैयद मोहतारिम समी आगई, साफरीन फातिमा, आविदा फातिमा, प्रो. अमिता शर्मा आदि लोग उपस्थित थे।

 

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