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108 रुद्राभिषेक की पूणार्हुति, पूर्णिमा की महाआरती में गूंजा हर-हर महादेव

श्वेत पुष्पों से सजे बाबा श्याम, सावन महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब
बाबा न्यूज
आगरा। जीवनी मंडी परिसर स्थित श्री खाटू श्याम जी मंदिर के श्री श्यामेश्वर महादेव मंदिर में चल रहे सावन महोत्सव के अंतर्गत एक माह से प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे 108 रुद्राभिषेक का सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर विशेष महा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। महाआरती के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोष से गूंज उठा।
सावन मास के प्रारंभ से ही श्री श्यामेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराया जा रहा था। सावन के प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जल, दूध, दही, घी, शहद सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों से अभिषेक कर सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं परिवार की मंगलकामना की। सावन पूर्णिमा पर इस धार्मिक अनुष्ठान की पूणार्हुति विशेष महाआरती के साथ हुई।
समापन अवसर पर मंदिर के मुख्य ट्रस्टी हेमेंद्र अग्रवाल एवं सीमा अग्रवाल ने विधि-विधान के साथ महा रुद्राभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार और भगवान शिव के जयकारों के बीच हुए अभिषेक से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। पंडित मुकेश शर्मा और अनंत उपाध्याय ने विधि विधान से पूजन संपन्न कराया।
मंदिर के अध्यक्ष दिनेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि सावन महोत्सव के अंतर्गत विगत एक माह से प्रतिदिन रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा था। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसी धार्मिक भावना के साथ मंदिर में पूरे सावन माह श्रद्धालुओं को भगवान शिव की भक्ति और रुद्राभिषेक से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि 108 रुद्राभिषेक की पूणार्हुति के अवसर पर विशेष महाआरती का आयोजन किया गया।
सावन पूर्णिमा के अवसर पर बाबा श्याम का विशेष श्वेत पुष्पों से श्रृंगार किया गया। सफेद पुष्पों से सजे बाबा श्याम का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर में बाबा श्याम के मनोहारी दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रही। श्वेत पुष्पों की मनमोहक सजावट और दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत आकर्षक और आध्यात्मिक नजर आया।
सावन पूर्णिमा की विशेष महाआरती में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भाग लिया। घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के बीच भगवान श्यामेश्वर महादेव एवं बाबा श्याम की आरती उतारी गई।
इस अवसर पर संजय अग्रवाल, अमित गोयल, विपिन बंसल, विकास गोयल आदि उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन पर ठाकुर श्याम बिहारी को धराई राखी

यशोदा मैया के वात्सल्य भाव में रंगा प्रेमनिधि मंदिर
सफेद घटा के हिंडोले में विराजे बाल कृष्ण
हरिनाम संकीर्तन से गूंजा नाई की मंडी का श्री प्रेमनिधि जी मंदिर
बाबा न्यूज
आगरा। नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में सावन पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पुष्टिमार्गीय सेवा-परंपरा के अनुरूप हिंडोला उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर ठाकुर श्याम बिहारी जी को सफेद घटा का मनोहारी श्रृंगार धारण कराकर हिंडोले पर विराजित किया गया और रक्षाबंधन के विशेष भाव के अनुरूप उन्हें रक्षा-सूत्र अर्थात राखी धराई गई। बाल स्वरूप ठाकुरजी के प्रति वात्सल्य, ममत्व और उनकी रक्षा की कामना से जुड़ा यह प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष भाव-विभोर करने वाला रहा।
सफेद घटा के मध्य हिंडोले पर विराजमान ठाकुरजी के दिव्य स्वरूप के दर्शन के साथ मंदिर में हरिनाम संकीर्तन एवं पुष्टिमार्गीय पद गायन हुआ। पदों और कीर्तन में यशोदा मैया के वात्सल्य भाव, अपने लाल कन्हैया की बलैया लेने और उन्हें बुरी नजर एवं समस्त बाधाओं से बचाने के प्रसंगों का भावपूर्ण गायन हुआ। दिनेश पचौरी और अमित शर्मा द्वारा किए गए संकीर्तन की मधुर स्वर लहरियों से पूरा मंदिर परिसर कृष्णमय हो उठा।
पुष्टिमार्ग में रक्षाबंधन का भाव भाई-बहन के रिश्ते से अलग
मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी और सुमित गोस्वामी ने बताया कि पुष्टिमार्ग में रक्षाबंधन का भाव सामान्य रूप से प्रचलित भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। यहां इस उत्सव का मूल भाव ठाकुरजी के बाल स्वरूप के प्रति वात्सल्य और उनकी रक्षा की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन वैष्णव माँ यशोदा के भाव से ठाकुरजी की सेवा करते हैं। जिस प्रकार यशोदा मैया अपने लाल कन्हैया और बलदाऊ की बुरी नजर, बाधा एवं किसी भी अपशकुन से रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधती थीं, उसी वात्सल्य भाव से ठाकुरजी को राखी धराई जाती है। इसमें भक्त स्वयं को यशोदा मैया के वात्सल्य भाव में अनुभव करते हुए ठाकुरजी के सुख, मंगल और रक्षा की कामना करता है।
सेवायतों ने बताया कि पुष्टिमार्गीय सेवा में ठाकुरजी को केवल आराध्य मानकर पूजा नहीं की जाती, बल्कि उन्हें बालक के रूप में प्रेम, ममता और वात्सल्य से सेवा-सुख दिया जाता है। रक्षाबंधन पर राखी धराना भी इसी आत्मीय सेवा का हिस्सा है।
इस अवसर पर गाए जाने वाले कीर्तन और पदों में मैया यशोदा द्वारा अपने लाल की बलैया लेने, नजर उतारने और उन पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने का भाव प्रकट होता है। यही वात्सल्य भाव रक्षाबंधन को पुष्टिमार्ग में विशिष्ट आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करता है।
रक्षाबंधन के अवसर पर सफेद घटा के हिंडोले में ठाकुर श्याम बिहारी जी के दर्शन और राखी की सेवा ने मंदिर परिसर में वात्सल्य एवं कृष्ण प्रेम की अनुपम अनुभूति कराई। श्रद्धालु ठाकुरजी के बाल स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते रहे।