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मोरारी बापू बोले, भोजन कम करो, भजन ज्यादा

मानस ऋषि पंचमी में ऋषि की सिद्धि और मुनि की शुद्धि का रहस्य समझाया, मौन को बताया भीतर उतरने का मार्ग
बाबा न्यूज
आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड में करुणानिधान परिवार की ओर से आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तृतीय दिवस रामनाम, कृष्ण-भक्ति और संतवाणी का ऐसा रस बरसा कि हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूब गए। मोरारी बापू ने ह्यमानस ऋषि पंचमीह्ण के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए ऋषि और मुनि के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि ऋषि बाहर के ब्रह्मांड की खोज करता है, जबकि मुनि भीतर के ब्रह्मांड में उतरता है। कथा के दौरान मीराबाई के पदों और रामधुन ने वातावरण को भावविभोर कर दिया और कई श्रद्धालुओं की आंखों से भक्ति के आंसू छलक पड़े।
बापू ने मानस से ह्यऋषिह्ण शब्द उठाते हुए सभी मुनियों को प्रणाम किया और कहा कि दुनिया में जितने भी बड़े वैज्ञानिक हुए—चाहे आइंस्टीन हों, न्यूटन हों अथवा अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले नील आर्मस्ट्रांग—उन्होंने बाहरी जगत और ब्रह्मांड को जानने का प्रयास किया। भारतीय मनीषा ने ऐसे अन्वेषकों को ऋषि-भाव से देखा है। उन्होंने कहा कि परमाणु से लेकर अंतरिक्ष तक की खोज करने वाला बाहरी ब्रह्मांड को जानता है, जबकि मुनि अपने भीतर उतरकर अंतर्जगत की खोज करता है।

काकभुशुंडि जी ने की बाहर और भीतर दोनों यात्राएं
बापू ने रामकथा के परम गायक काकभुशुंडि जी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी यात्रा बाहरी और भीतरी दोनों रही। एक ने ब्रह्मांड को देखा और दूसरे ने अपने भीतर के ब्रह्मांड को जाना। विश्वामित्र जब स्वर्ग की रचना करते हैं तो उनका ऋषि स्वरूप सामने आता है और जब भीतर के दर्शन को जागृत करते हैं तो मुनि भाव प्रकट होता है।
उन्होंने साधकों से मौन का अभ्यास करने का आग्रह किया। कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन मौन रखना चाहिए। यदि यह संभव न हो तो अपने जन्मदिन पर अपनी आयु के बराबर घंटे मौन धारण करें।

कबीर से मीराबाई तक—ऋषि भी, मुनि भी और साधु भी
श्रद्धालुओं की प्रश्न-पत्रियों का उत्तर देते हुए बापू ने कबीर, गुरु नानक, रामकृष्ण, मीराबाई, नरसी मेहता और तुकाराम जैसे संतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इनमें ऋषि और मुनि दोनों के गुण दिखाई देते हैं, इसलिए ये संयुक्त रूप से साधु-स्वरूप हैं।
गुरु का चित्र घर में रखने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि गुरु का चित्र आंखों के सामने रहकर प्रेरणा देता है। महाभारत के एकलव्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने गुरु की मूर्ति के सामने साधना की और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि चित्र केवल देखने के लिए नहीं, चरित्र धारण करने की प्रेरणा के लिए होना चाहिए।

राम की हर लीला जीवन का चित्रण
बापू ने श्रीराम के जीवन की विभिन्न लीलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या से लेकर पंचवटी, वनवास, किष्किंधा, रावण युद्ध और रामराज्याभिषेक तक भगवान राम ने अपने जीवन से धर्म और मयार्दा का चित्रण किया। इसी तरह श्रीकृष्ण की लीलाएं ब्रज में प्रेम, भक्ति और समर्पण का संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि सच्चा शिष्य अपने गुरु का बहुत अधिक बखान नहीं करता। सच्चे शिष्य के आचरण से ही गुरु की खुशबू फैलती है।

ऋषियों के पास सिद्धि, मुनियों के पास शुद्धि
बापू ने कहा कि ऋषियों के पास सिद्धियां होती हैं और मुनियों के पास शुद्धि। ऋषि कर्मयोगी होते हैं और समाज के लिए निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि कपटपूर्ण साधु-संग से बचना चाहिए। जिसके पास भजन की संपदा नहीं है, वह मुनि नहीं हो सकता। मुनि का मौन भी सार्थक होता है और उसका वचन भी। इसलिए किसी का संग सोच-समझकर करना चाहिए।
जगद्गुरु वल्लभाचार्य के सूत्र का उल्लेख करते हुए बापू ने कहा कि घर के लोग एक-दूसरे के सहायक बनें तो वही सत्संग है। यदि वे स्वयं सत्संग न करें लेकिन आपको रोकें भी नहीं, तो उनके प्रति धन्यवाद का भाव होना चाहिए।

युवाओं के तनाव का उपाय—एकांत में हनुमान चालीसा
युवाओं में बढ़ते तनाव से जुड़े प्रश्न पर बापू ने कहा कि सुबह और शाम कुछ समय एकांत में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी का ध्यान चंचल मन को शांत करता है।
व्यासपीठ के पीछे हनुमान जी का चित्र रखने के कारण पर उन्होंने कहा कि व्यासपीठ की जो भी प्रतिष्ठा है, वह हनुमान जी की है। उन्होंने हनुमान जी को गृहस्थ, ब्रह्मचारी, संन्यासी और वानप्रस्थ—हर अवस्था के लिए आदर्श बताया।

भोजन कम करो, भजन ज्यादा
बापू ने श्रद्धालुओं को सरल लेकिन गहरा जीवन सूत्र देते हुए कहा—भोजन कम करें और भजन ज्यादा करें। उन्होंने कहा कि भजन केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि मनुष्य को भीतर से बदलने वाली साधना है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में दुखी मिलने वाले व्यक्ति को गले लगाकर चलें और प्रेम की गंगा बहाते रहें।

मीराबाई के पदों पर छलकीं आंखें
रामकथा के बीच श्रीकृष्ण की धुन और मीराबाई के पदों की गूंज उठी। बापू ने जब मीरा की कृष्णभक्ति का गुणगान किया तो कथा पंडाल में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। बापू ने कहा कि जो मानस की उपासना करेगा, मानस सदैव उसके समक्ष खड़ा रहेगा। रात को सोने से पहले मानस की कुछ चौपाइयों का पाठ करें और शुभ विचारों के साथ सोएं।

मशीन मशीन है, व्यासपीठ मिशन है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उल्लेख करते हुए बापू ने कहा कि तकनीक मनुष्य के लिए उपयोगी है, लेकिन यदि तकनीक मन और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने लगे तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मशीन मशीन होती है, लेकिन व्यासपीठ एक मिशन है—सच्चे मनुष्य बनाने का मिशन।
कथा के दौरान उमाशंकर व्यास, श्री प्रेमनिधि मंदिर के मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने आरती उतारी।

पीतांबर में सजे महागणपति, नन्हे भक्तों ने किया हवन

पंचम गणेश महोत्सव के चतुर्थ दिवस फूल बंगले में दिव्य दर्शन
पीले वस्त्रों और स्वणार्भूषणों से सजा भगवान का स्वरूप
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आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में चल रहे 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव के चतुर्थ दिवस गुरुवार को भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति ने पीतांबर धारण कर भक्तों को दर्शन दिए। पीली धोती और पीला मुकुट धारण किए महागणपति स्वर्ण मुकुट, कुंडल और विभिन्न स्वणार्भूषणों से सुसज्जित थे। लाल गुलाब के फूलों की माला और मस्तिष्क पर वैष्णव तिलक उनके दिव्य स्वरूप की शोभा बढ़ा रहे थे। फूल बंगले में विराजमान भगवान के मनोहारी दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।
महोत्सव के चतुर्थ दिवस दो नन्हे भक्तों मायरा और इवान ने श्री गणपति महाराज का हवन किया। उनके साथ रोहित रल्लन और सार्थक गुप्ता ने भी परिवार सहित हवन में आहुति अर्पित की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हवन में भक्तों ने भगवान गणपति से सुख-समृद्धि और मंगलकामना की।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित और प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि गणेश महोत्सव के दौरान प्रतिदिन प्रात: 7:30 बजे नित्य अभिषेक सेवा की जा रही है। इसके बाद भगवान का वस्त्र श्रृंगार एवं फल सेवा होती है। प्रतिदिन विभिन्न भोग सेवाओं के साथ भोग आरती, दोपहर भोग और सायं भोग अर्पित किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि महोत्सव में प्रतिदिन प्रात: एवं सायंकाल महागणपति हवन का आयोजन हो रहा है। सायं 6 बजे सहस्रनाम अर्चना, 7 बजे महाआरती और रात्रि 9 बजे शयन आरती होती है।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग ने बताया कि गणेश महोत्सव के प्रत्येक दिवस भगवान श्री महागणपति का अलग-अलग स्वरूप में श्रृंगार कर भक्तों को दर्शन कराए जा रहे हैं। पीतांबर में सजे महागणपति का आज का स्वरूप विशेष रूप से मनोहारी रहा। उन्होंने कहा कि महोत्सव में नन्हे भक्तों और परिवारों की हवन-पूजन में सहभागिता से आयोजन का आध्यात्मिक उत्साह और बढ़ रहा है।

 

श्री मनः कामेश्वर रामलीला महोत्सव: शमशाबाद की शिव वाटिका में होगा राम बारात का स्वागत

 

शमशाबाद में गूंजेगा राममय उल्लास, तुलसी-शालिग्राम विवाह में दिखेगी जनकपुरी जैसी भव्यता
गढ़ी ईश्वरा से पहली बार शमशाबाद पहुंचेगी राम बारात, 50 से अधिक झांकियां होंगी शामिल

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आगरा। श्री मनः कामेश्वर मठ मंदिर के रामलीला महोत्सव में इस बार शमशाबाद की धरती भी राममय होगी। गढ़ी ईश्वरा से निकलने वाली भव्य राम बारात का शमशाबाद स्थित शिव वाटिका में भव्य स्वागत किया जाएगा। यहां भगवान श्रीराम-जानकी विवाह के स्वरूप में श्री तुलसी-शालिग्राम जी का विवाह वैदिक विधि-विधान से संपन्न होगा। आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जो इस दिव्य विवाह में कन्यादान कर पुण्य के भागी बनेंगे।
श्री मनः कामेश्वर मठ मंदिर द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव का शुभारंभ 11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन होगा और 21 अक्टूबर को भगवान राजा रामचंद्र जी के राज्याभिषेक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन होगा। इसी क्रम में इस बार पहली बार गढ़ी ईश्वरा से करीब आठ किलोमीटर दूर शमशाबाद तक राम बारात ले जाने की योजना बनाई गई है।
राम बारात में 50 से अधिक झांकियां शामिल होंगी। इनमें श्री मनः कामेश्वर नाथ जी का भव्य स्वरूप, स्थानीय बालिकाओं द्वारा नव देवियों की झांकी, महिला सशक्तिकरण और आत्मरक्षा का संदेश देने वाली प्रस्तुतियां तथा बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का संदेश प्रमुख रहेगा। आधुनिक साज-सज्जा के साथ सनातन परंपराओं का समावेश झांकियों को विशेष आकर्षण देगा।

शिव वाटिका में दिखेगी जनकपुरी जैसी भव्यता
शमशाबाद की शिव वाटिका में राम बारात के स्वागत और तुलसी-शालिग्राम विवाह को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का प्रयास है कि पूरा परिसर जनकपुरी की तरह सजे और विवाह समारोह में वही उत्साह, उल्लास और श्रद्धा दिखाई दे, जिसकी कल्पना भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह से जुड़ी परंपराओं में की जाती है।
श्री मनः कामेश्वर मठ मंदिर प्रशासक हरिहर पुरी का कहना है कि यह क्षेत्र के लिए पहली बार ऐसा अवसर है। बाबा की कृपा से मिले इस अवसर को यादगार बनाने के लिए पूरी टीम प्रयास कर रही है। शिव वाटिका को बेहतर से बेहतर रूप देने और श्रद्धालुओं के स्वागत में कोई कमी न रहे, इसके लिए स्थानीय लोगों द्वारा पूरी लगन से तैयारियां की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाएं और सनातन परंपराएं किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सांस्कृतिक विरासत हैं। राम बारात में सभी वर्गों की सहभागिता इस आयोजन को और विशेष बनाएगी।
श्रीराम बारात के स्वागत में मुस्लिम समाज से जुड़े शाहरुख का विशेष सहयोग इसी साझा सांस्कृतिक विरासत और ‘मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन प्रेम और आस्था इंसान को जोड़ते हैं’ के भाव को मजबूत करेगा।

शहर की सीमा से बाहर निकलेगा रामलीला का उल्लास
शमशाबाद निवासी रोहित गौड़ ने कहा कि यह आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि राम बारात और जनकपुरी जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों का उल्लास अब आगरा शहर की सीमा से बाहर गांव और कस्बों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा, “श्री मनः कामेश्वर मठ मंदिर की यह पहल शमशाबाद क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। पहली बार इतनी भव्य राम बारात यहां पहुंचेगी। इससे क्षेत्र के लोगों को अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। शिव वाटिका में तुलसी-शालिग्राम विवाह और हजारों श्रद्धालुओं द्वारा कन्यादान का दृश्य निश्चित रूप से भावुक और अविस्मरणीय होगा।

विश्वामित्र बनकर घोड़े पर चलेंगे महंत योगेश पुरी
राम बारात में श्री महंत योगेश पुरी विश्वामित्र के स्वरूप में घोड़े पर सवार होकर भगवान के स्वरूपों के साथ चलेंगे। पूरे मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। घर-घर रंगोली और रोशनी होगी तथा सैकड़ों स्थानों पर भगवान के स्वरूपों का स्वागत, आरती और सम्मान किया जाएगा।
श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि गांव की भूमि केवल खेती और जीवन-यापन की भूमि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की जीवंत धरती है। इसी भावना के साथ भगवान श्रीराम की लीलाओं को गांव की पावन धरा पर मंचित किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी भगवान श्रीराम के जीवन, मर्यादा, त्याग और संस्कारों को करीब से समझ सके।

प्राचीन सिद्धि विनायक मंदिर से गणपति के जयकरों के साथ निकली 66वीं भव्य शोभायात्रा

 

 

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आगरा। प्राचीन श्री सिद्धिविनायक मंदिर, गोकुलपुरा में 66वें गणेश महोत्सव का सोमवार को विधि विधान से पूजन कर और गणपति बप्पा मोरया के जयकारें लगाकर शुभारंभ हुआ। इसके बाद मंदिर से विशेष रथ में बैठकर शोभायात्रा में निकले चंदन के भगवान गणेश ने क्षेत्र के भक्तों को दर्शन दिए। वहीं गणपति भक्तों ने कई स्थानों पर गणपति जी की आरती उतारी।
प्राचीन श्री सिद्धिविनायक मंदिर महंत पं. मनीष शर्मा ने बताया कि 66वें गणेश उत्सव में प्रातः प्राचीन चंदन की गणेश प्रतिमा का गन्ने के रस से अभिषेक कर भव्य श्रृंगार किया गया और भव्य फूल बंगला में गणपति जी को विराजित कर उनके सम्मुख 56 भोग का प्रसाद अर्पित किया गया। इसके उपरांत 100 बच्चों का पट्टी पूजन किया। शाम के समय गणेश महोत्सव का भाजपा नेता डाॅ. अलौकिक उपाध्याय ने गणपति जी की प्राचीन प्रतिमा का पूजन कर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। मंदिर से शुरु हुई गणेश शोभायात्रा ने क्षेत्र के गोकुलपुरा, घटिया, छपैटी, राजामंडी बाजार आदि का भ्रमण कर पुनः मंदिर पर आकर विश्राम लिया। इस दौरान सैकड़ों गणपति भक्त शोभायात्रा में गणपति के गीतों पर झूमते नजर आए। शोभायात्रा में कमेटी के अध्यक्ष रजत अस्थाना, शरद अस्थाना, नरेश शर्मा, जितेंद्र प्रताप सिंह, उमेश उपाध्याय, सौरभ वर्मा, यश पंडित, अतुल गौतम, आशु अग्रवाल, विजय यादव, वैभव शर्मा, कुणाल गौतम, कृष्णा वर्मा सहित सैकड़ों गणपति भक्त शामिल रहे।

महाभिषेक के साथ शुरू हुआ 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव

श्री वरद वल्लभा महागणपति को प्रतिदिन लगेगा विशेष भोग, 101 किलो मेवा मोदक के होंगे दिव्य दर्शन

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आगरा। छलेसर रोड स्थित श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर में 12 दिवसीय पंचम गणेश महोत्सव का शुभारंभ भगवान गणपति के महाभिषेक के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए महाभिषेक के बाद भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर में गणपति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन भगवान के नित्य अभिषेक, भव्य श्रृंगार और फूल बंगला के दर्शन होंगे। उत्सव का विशेष आकर्षण 101 किलो मेवा मोदक के दर्शन होंगे।
मंदिर के संस्थापक हरिमोहन गर्ग (एनआएल) ने कहा कि गणेश महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और भगवान गणपति के प्रति समर्पण का पर्व है। महोत्सव में प्रतिदिन होने वाली पूजा-अर्चना और विशेष श्रृंगार के माध्यम से श्रद्धालुओं को गणपति की आराधना का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि 101 किलो मेवा मोदक का भोग भगवान के प्रति भक्तों की अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित लखन दीक्षित और प्रबंधक नितिन शर्मा ने बताया कि महोत्सव के दौरान प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे नित्य अभिषेक सेवा होगी। इसके बाद भगवान का वस्त्र एवं श्रृंगार किया जाएगा और फल सेवा अर्पित की जाएगी। प्रतिदिन भगवान को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
इसके साथ ही महागणपति हवन का आयोजन भी प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल किया जाएगा। गणेश महोत्सव के दौरान प्रतिदिन सायं 6 बजे भगवान श्री वरद वल्लभा महागणपति की सहस्रनाम अर्चना होगी। इसके बाद सायं 7 बजे महाआरती की जाएगी। रात्रि 9 बजे शयन आरती के साथ भगवान की नित्य सेवा संपन्न होगी।
मंदिर में होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान गणपति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहेगा।
बता दें कि श्री वरद वल्लभा महागणपति मंदिर अपनी दक्षिण भारतीय पूजा पद्धति और स्थापत्य शैली के लिए विशेष पहचान रखता है। मंदिर की अष्टकोणीय बनावट और भव्य संरचना श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। यहां दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुरूप भगवान गणपति की पूजा-अर्चना की जाती है।

अन्नपूर्णा भोजनालय बना मां नरी सेमरी के भक्तों के लिए सेवा और अपनत्व का केंद्र

 

51 शक्तिपीठों के दिव्य चित्रों की स्थापना से बढ़ी भोजनालय की आध्यात्मिक गरिमा, श्रद्धालुओं को मिल रहा निःशुल्क प्रसाद

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आगरा। नरी सेमरी मंदिर आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद सहित देश-विदेश में बसे असंख्य परिवारों की कुलदेवी और आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। विवाह, संतान जन्म, गृह प्रवेश और अन्य शुभ अवसरों पर भक्त मां के दरबार में शीश नवाने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की इसी भावना को ध्यान में रखते हुए बब्बू भैया इंद्रपुरी दरबार की प्रेरणा से बरफी देवी चैरिटेबल सोसायटी ने मां नरी सेमरी की बड़ी धर्मशाला में अन्नपूर्णा भोजनालय का निर्माण कराया है।
भोजनालय अब श्रद्धालुओं के लिए भोजन, प्रसाद और आत्मीय सेवा का केंद्र बन रहा है। यहां प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल मां को भोजन थाली का भोग अर्पित किया जाता है। दोपहर में स्नैक्स सेवा, सायंकाल दूध सेवा और मंगला आरती के समय आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चाय की व्यवस्था है।
गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर भोजनालय में भगवान श्री गणेश के चित्र के साथ मां के 51 शक्तिपीठों के भव्य चित्र स्थापित किए गए। इन चित्रों में शक्तिपीठों के स्थान और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का भी उल्लेख है। इससे श्रद्धालुओं को मां नरी सेमरी के दर्शन के साथ ही 51 शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हो रहा है।
इस व्यवस्था को साकार करने में श्री चंद्रभान साबुन वाले सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। उन्होंने भोजनालय की सेवा व्यवस्था शुरू कराने में हलवाई और कारीगरों की व्यवस्था सहित महत्वपूर्ण योगदान दिया। संस्था ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
मां नरी सेमरी देवी क्षेत्र विकास समिति द्वारा निर्मित विशाल धर्मशाला इस सेवा कार्य का आधार बनी है। समिति के रविकांत गर्ग, मूलचंद गर्ग, विजय कुमार अग्रवाल, प्रवीण कुमार, रवि कुमार, नरेश चंद्र, राजकुमार और गोविंद जी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मां के दर्शन के लिए आने पर बड़ी धर्मशाला में अवश्य पधारें और अन्नपूर्णा भोजनालय की सेवा का लाभ लें।

23 वर्ष बाद फिर आगरा पधारेंगे मोरारी बापू, रामकथा के स्वागत में सजा जेपी वेडिंग ग्राउंड

15 से 23 सितंबर तक होगा नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन, 40 हजार वर्गफुट का वाटरप्रूफ पंडाल तैयार
5000 से अधिक श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, भोजन प्रसादी से लेकर सुरक्षा और चिकित्सा तक के व्यापक इंतजाम

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आगरा। 23 वर्ष बाद एक बार फिर ताजनगरी आगरा संत मोरारी बापू के पावन सानिध्य में रामकथा के अमृत वचनों से सराबोर होने जा रही है। 15 से 23 सितंबर तक फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड में नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया जाएगा। मोरारी बापू की अमृतमयी वाणी से रामकथा के मर्म का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आगरा सहित विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजन को लेकर कथा स्थल पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
करुणानिधान परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस रामकथा के लिए जेपी वेडिंग ग्राउंड को विशेष रूप से तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा, कथा श्रवण, भोजन प्रसादी, सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

40 हजार वर्गफुट में तैयार हुआ वाटरप्रूफ कथा पंडाल
करुणानिधान परिवार के ललित गुप्ता, सतीश शाह और मनीष मित्तल ने बताया कि कथा के लिए 40 हजार वर्गफुट क्षेत्रफल में वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किया गया है। इसमें 40 बाई 32 फुट का विशाल मंच बनाया गया है, जहां व्यास गादी विराजित होगी। इसी व्यास गादी से मोरारी बापू श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराएंगे। कथा पंडाल में 5000 से अधिक श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई है। कुर्सियों के साथ गद्दों पर बैठकर कथा सुनने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, ताकि श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार स्थान ग्रहण कर सकें।

पहले दिन शाम को होगी कथा, फिर प्रतिदिन सुबह का आयोजन
रामकथा का शुभारंभ 15 सितंबर को शाम 4 बजे से 7 बजे तक होगा। इसके बाद 16 से 23 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा।
मोरारी बापू अपनी अमृतमयी वाणी से रामचरितमानस के मर्म और भगवान श्रीराम के आदर्शों का संदेश देंगे। कथा में आगरा के साथ विभिन्न प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल होंगे।

बापू के संदेश के अनुरूप भोजन प्रसादी की विशेष व्यवस्था
आयोजन समिति ने बताया कि मोरारी बापू का कहना है कि कथा स्थल पर आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु कथा के रसपान के साथ-साथ भोजन से भी तृप्त होकर जाए। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए कथा स्थल पर भोजन प्रसादी की व्यापक व्यवस्था की गई है।
इसके लिए अलग से विशाल भोजन पंडाल तैयार किया गया है, जहां एक बार में लगभग 1000 श्रद्धालु बैठकर प्रसादी ग्रहण कर सकेंगे। भोजन प्रसादी तैयार करने के लिए ग्वालियर से विशेष रूप से हलवाई बुलवाए गए हैं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए भोजन व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।

गुजरात से आएंगे संगीतकार, कथा में देंगे संगीतमय संगत
रामकथा के दौरान संगीतमय वातावरण बनाने के लिए गुजरात से विशेष रूप से संगीतकार आमंत्रित किए गए हैं। ये संगीतकार मोरारी बापू की कथा के दौरान संगीत संगत देंगे। कथा के आध्यात्मिक भावों के अनुरूप संगीत की यह प्रस्तुति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगी।

सुरक्षा, स्वच्छता और पार्किंग पर विशेष ध्यान
कथा में देश के विभिन्न प्रदेशों से श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए गुजरात से 20 सुरक्षा गार्ड बुलवाए गए हैं। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
स्वच्छता व्यवस्था के लिए वाराणसी से कर्मचारी बुलवाए गए हैं। वहीं, पार्किंग में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए 40 लोगों की तैनाती की जाएगी। आयोजन समिति को स्थानीय प्रशासन का भी विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।

आवास, चिकित्सा और अग्निशमन के भी रहेंगे इंतजाम
विभिन्न प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास की उचित व्यवस्था की गई है। कथा स्थल पर चिकित्सक और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके।
इसके साथ ही अग्निशमन व्यवस्था के लिए फायर ब्रिगेड की तैनाती तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बायो टॉयलेट की व्यवस्था भी की गई है।

आगरा में सिंधिया राजघराने से जुड़ा है गोकुलपुरा का श्री सिद्धी विनायक मन्दिर

 

खुदाई के दौरान निकली थी प्रतिमा, 1760 में करायी गयी थी स्थापना
प्रस्तुति: महन्त पंडित मनीष शर्मा
आगरा। शहर में अकेले गणेश का विग्रह गोकुलपुरा राजामण्डी मौहल्ले में गणेश जी का एकमात्र ऐतिहासिक श्री सिद्धी विनायक मन्दिर हैं जिसकी प्रतिमा खुदाई के दौरान कुए से निकली थीे। इसकी स्थापना आज से लगभग 380 वर्ष पहले सम्वत 1700 (सन 1646 ई0) में की गई थी। महन्त श्री सिद्धी विनायक मन्दिर के महन्त पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि मराठा सरदार महादाजी सिंधिया द्वारा पुन: जीर्ण उद्धार एवं मन्दिर की स्थापना सन 1760 में की गयी तथा मन्दिर में एक पीपल का वृक्ष भी लगाया। उन दिन वह ग्वालियर के शासक थे तथा आगरा प्रवास में उन्होनें डेरा गणेश मन्दिर की स्थापना की। जो कालान्तर में सिद्धी विनायक के नाम से लोकप्रिय हो गया। कालान्तर में ग्वालियर राज्य के विस्तार के साथ महादाजी सिन्धिया की ओर से इस मन्दिर की देखभाल तथा नियमित खर्च (सेवा-पूजा) के लिए आठ आना प्रतिदिन का आज्ञा पत्र (सनद) मराठा शासन के नाम जारी किया गया मन्दिर के पुजारी के पास ऐतिहासिक धरोहर आज भी सुरक्षित है।
गुजराती (नागर) और मराठा परिवारों की आस्था के केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित इस मन्दिर में अपने आगरा प्रवास के दौरान ग्वालियर नरेश महादजी सिंधिया नियम पूर्वक अपनी उपस्थिति में पूजन-अर्चन कराते रहे। उन्होनें ही चतुर्थी के दिन शाही संरक्षण में धूमधाम के साथ गणेश शोभायात्रा की शुरूआत कराई जो सन 1860 तक जारी रही तथा एक हमले के कारण बन्द होने के बाद भारत की स्वतंत्रता के उदय के साथ सन 1959 में पुन: प्रारम्भ हुई तथा एक परम्परा के रूप में यथावत हैं सम्भवत: आगरा में गणेशोत्सवों की परम्परा में यह सबसे प्राचीन धर्म स्थल है।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी का महत्व: इस तिथि को विशिष्ट रूप से श्री गणेश जी के आयोजन मनाये जाते हैं। यह तिथि अनेक दृष्टियों में महत्वपूर्ण है। श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को ही हुआ था। तब भगवान शिव के कैलाश पर्वत पर इसी जन्मोत्सव को मनाने का आयोजन किया था। सिन्दूर दैत्य पर भी श्री गणेश जी ने इसी तिथि को विजय प्राप्त की थी। इसलिए भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर पार्थिव पूजन का विधान है। इस चतुर्थी को डांडिया चतुर्थी के भी नाम से जाना जाता है तथा छोटे बच्चों द्वारा डांडिया का पूजन कराया जाता है तथा पट्टी पूजन भी कराया जाता है।
चन्द दर्शन क्यों नहीं: इस व्रत के गंभीर आध्यात्मिक उद्देश्य हैं चतुर्थी का अभिप्राय: जागृति स्वप्न, सुशुप्ति के उस पार की तुरीय अवस्था से लिया जाता है जिसे जीवन का अन्तिम लक्ष्य माना जाता है उस दिन चन्द्र दर्शन को निषेध माना जाता है। क्योंकि चन्द्र मन की सन्तप्ति है। आध्यात्मिक क्षेत्र में उसे मन का प्रतीक और पयार्वाची माना जाता है जब मन असंयमित होता है तो किसी भी आध्यात्मिक साधना में प्रगति नहीं हो सकती। मन का विग्रह है सभी शुद्धियों का श्रृल माना जाता है। अत: सभी साधनायें इसी पर ही केन्द्रित रहती है। इस पर विजय प्राप्त किये बिना तुरीय अवस्था तक पहुंचना असम्भव है। आज के दिन बच्चों का पट्टी पूजन शिक्षा का श्री गणेश भी होता है। इसलिए बच्चों का चन्द्रमा मन एकाग्रता प्राप्त करें। इस दिन चन्द्र दर्शन न किया जाये। अर्थात मन पर विजय प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाये अथवा मौनवस्था की ओर लाया जाये तो लक्ष्य की प्राप्ति में सुविधा होगी।

गणपति के अचूक उपाय

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए: कमल गट्टे की माला चढ़ायें। मनोकामना पूर्ति के लिए: नारियल चढ़ायें व सिन्दूर अर्पित करें। विद्या प्राप्ति व परीक्षा में सफलता के लिए: घी व गुड़ चढ़ायें। कर्ज से मुक्ति के लिए: खीर व कमल के फूलों की माला चढ़ायें। विवाह कामना के लिए: हल्दी की 7 गांठे पीले चावल व पीली मिठाई चढ़ायें। सन्तान प्राप्ति की कामना हेतु: तिल से बनी मिठाई व पान का बीड़ा चढ़ायें। सुख शान्ति एवं समृद्धि हेतु : मोदक व दुर्वा चढ़ाये। व्यापार में वृद्धि व वैभव हेतु: शमी के 5 पत्ते व पीले रंग का पीताम्बर अर्पित करें। रोग मुक्ति हेतु: हरे मूंग व गुड़ चढ़ायें व घी की 8 बत्ती का दीपक जलायें।

गणेश जी की स्थापना का शुभ महूर्त
14-09-2026 को प्रात: सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 तक।
अभिजीत मुहूत : 12:09 से 12:58 तक। चतुर्थी तिथि 14 सितम्बर 2026 को सुबह 7:06 से प्रारम्भ होकर 15 सितम्बर 2026 को सुबह 7:44 तक रहेगी ।
साल 2026 में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसके तहत ये दोनों ही पावन पर्व एक ही दिन 14 सितंबर 2026 को मनाए जाएंगे।
इस दिन सूर्योदय के समय तृतीया तिथि और मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि का संयोग रहेगा।
स्थापना की विधि
पीत वस्त्र पर चावल का स्वास्तिक बनाकर उस पर गणेश जी स्थापित करें। फिर पंचोपचार व षोडषाचार पूजन करें।
गणेश जी पर विशेष रूप से हरी दुर्वा चढ़ायें, घी का दीपक जलायें, मोदक पंच मेवा व पाँच फलों का भोग लगायें, नारियल, ताम्बुल व सुपारी चढ़ायें।

हजरत अहमद मुस्तफा के बताये रास्ते पर चलें: हजरत सैय्यद मोहतशिम अली

 

अबुल उलाह की दरगाह में जलसा आमद ए नूर का आयोजन
बाबा न्यूज
आगरा। दरगाह हजरत सय्यदना शाह अमीर अबुल उला रह. पर जुमेरात को जलसा आमद ए नूर का एहतमाम किया गया। पीर-ए-तरीकत हजरत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई सज्जादानशीन की सरपरस्ती में जलसे में उलमाओं ने सरकार ए दो आलम हजरत अहमद मुस्तफा की जिÞंदगी पर रौशनी डाली। लोगों को उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की हिदायत दी। मौलाना अब्दुल वहाब ने कुरआन पाक की तिलावत की। मुफ्ती मोहम्मद आसिफ रजा मुसद्दी, कन्नौज ने तकरीर की।
मौलाना अमान रजा अकबराबादी, जनाब कारी इमरान बरकाती (सादाबाद), जनाब आरिफ रजा कादरी (आगरा), हाजी सैय्यद गुलजार, सूफी दिलकश जालोनवी ने जलसे में शिरकत की।
सरकार ए दो आलम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की शान में नातें पड़ी गई और आपकी जिंदगानी पर रोशनी (प्रकाश) डाला। दरगाह के नायब सज्जादानशीन ने फरमाया के हुजरे अकरम (सल.) को रहमतुल आलमीन पूरे आलम का हिस्सा मिला इन सभी को तो मिला ही चरिन्दों परिन्दों जिन्नों मलायका को भी मिला। वाल्देन की एहमियत बच्चों की जिम्मेदारी बताई। जाहीलियत के दौर को बदलकर तमाम आलम के लोगों की जिन्दगी जीने का शअर दिया, वमा अरसलना का इल्ला रहमतल्लिल आलमीन वो तमाम आलम के लिए रहमत बनकर तशरीफ लाए।
सैय्यद आसिम अली अबुल उलाई ने हजरत मोहम्मद मुस्तफा की शान में नात ए पाक पढ़कर खराजे अकीदत पेश की गई।
नायब सज्जादगान हाजी सैय्यद विरासत अली अबुल उलाई, सैय्यद इशाअत अली अबुल उलाई और सैय्यद कैफ अली अबुल उलाई, सैय्यद आसिम अली अबुल उलाई, सैय्यद शाहब अली, सैय्यद अजहर अली, सैय्यद अरीब अली, सैय्यद सलीम उज जमा ने दरगाह शरीफ में चादरपोशी गुलपोशी और देश में अमन चैन की दुआ की व सूफी हजरात व जायरीनो ने शिरकत फरमाकर सवाब ए दारेंन हासिल किया। फातिहा के बाद लगर जारी रहा।

 

लड्डू गोपाल झूले में झूले, नंदोत्सव की खुशियों में झूमा श्री गिरिराज जी सेवा मंडल परिवार

 

श्री गिरिराज जी सेवा मंडल का भव्य नंदोत्सव, नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की… के जयघोष से गूंजा त्रिवेणी ग्रीन, माखन-मिश्री की झांकी और ब्रज के भजनों ने बांधा समां

बाबा न्यूज़ 

आगरा। श्री गिरिराज जी सेवा मंडल परिवार द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर फतेहाबाद रोड स्थित त्रिवेणी ग्रीन परिसर में भव्य एवं भक्तिमय नंदोत्सव का आयोजन किया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित नंदोत्सव में कान्हा के जन्म की खुशियां उल्लास और उमंग के साथ मनाई गईं। पूरा परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ संरक्षक महंत कपिल नागर, संस्थापक नितेश अग्रवाल, मयंक अग्रवाल एवं अध्यक्ष अजय सिंघल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात सभी ने श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ लड्डू गोपाल को झूला झुलाकर नंदोत्सव का शुभारंभ किया। जैसे ही ठाकुरजी झूले में विराजमान हुए, उपस्थित श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव की खुशी में झूम उठे।
नंदोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके जन्म से जुड़े प्रसंगों की मनोहारी झांकियां प्रस्तुत की गईं। माखन-मिश्री की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वहीं वासुदेव जी द्वारा नवजात कान्हा को लेकर यमुना पार करने और उन्हें गोकुल में माता यशोदा के पास पहुंचाने की झांकी का सजीव एवं भावपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस मनोहारी प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मानो द्वापर युग की उस दिव्य बेला का साक्षात अनुभव करा दिया।
नंदोत्सव में मोहन सैनी ने नंद बाबा और अंकित सैनी ने यशोदा मैया का स्वरूप धारण कर कान्हा के जन्म की खुशियां मनाईं। नंद बाबा और यशोदा मैया के रूप में उन्होंने ब्रजवासियों के बीच बधाइयां लुटाईं तथा उपहार वितरित किए। इस दौरान पूरा वातावरण ब्रज की संस्कृति, प्रेम और उल्लास से सराबोर हो गया।
बरसाना से विशेष रूप से पधारी श्री शरण की मंडली ने कृष्ण और राधा नाम की मधुर धुनों एवं सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर नंदोत्सव को और अधिक भक्तिमय बना दिया। राधा-कृष्ण के नाम के संकीर्तन पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। भजनों और जयकारों के बीच वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ब्रजभूमि का आनंदमय स्वरूप फतेहाबाद रोड पर साकार हो उठा हो।
श्री गिरिराज जी सेवा मंडल के संस्थापक नितेश अग्रवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, धर्म और मानवता की विजय का संदेश है। नंदोत्सव ब्रज संस्कृति की उस पावन परंपरा का प्रतीक है, जिसमें कान्हा के जन्म की खुशी को सभी के साथ बांटकर जीवन में प्रेम और आनंद का संचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्री गिरिराज जी सेवा मंडल परिवार हर वर्ष इसी भक्तिभाव के साथ नंदोत्सव का आयोजन करता है और हमारा प्रयास रहता है कि नई पीढ़ी भी ब्रज की महान संस्कृति, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और सनातन परंपराओं से जुड़ सके।
इस अवसर पर वीरेंद्र सिंघल, रविंदर गोयल, विशाल बंसल, विजय अग्रवाल, चंद्रमोहन बंसल, अंकुर अग्रवाल, पुनीत अग्रवाल, कुलभूषण गुप्ता (राम भाई), सतीश अग्रवाल, दिलीप बंसल, जितेंद्र शर्मा, सुमित सिंघल, लक्ष्मण सिंघल, मनोज गुप्ता, नरेंद्र गर्ग, नितिन अग्रवाल, मयंक जैन, गिरीश अग्रवाल, विकास वर्मा, अमित पाराशर, विकल गर्ग, विकास जैन, संजय जैन आदि उपस्थित रहे।